गज़ल--जाना होगा ...
खुशबू छाई जो फिजाओं में तो जाना जानां |
आपसे हमको मुलाक़ात को जाना होगा |
झूम के बरसा जो सावन तो हमें ऐसा लगा,
अब तो जाना ही हमें जाना ही जाना होगा |
फिर तो ये दिल भी लगा पहलू से अपने जाने,
आपने ही तो सदा देके पुकारा होगा |
अप थे सोच में, आयेंगे कि न आयेंगें ,
याद अपनों ने किया कैसे न आना होगा |
बड़ी शिद्दत से किया याद बुलाया ए हुज़ूर ,
कौन अब कैसे कहे, 'यार! न आना होगा' |
रूह में तुम थे समाये तो चले आये श्याम,
हम ही जब होंगे नहीं आना क्या आना होगा ||








