गये साल को है प्रणाम! है नये साल का अभिनन्दन।। लाया हूँ स्वागत करने को थाली में कुछ अक्षत-चन्दन।। है नये साल का अभिनन्दन।। गंगा की धारा निर्मल हो, मन-सुमन हमेशा खिले रहें, हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई के, हृदय हमेशा मिले रहें, पूजा-अजान के साथ-साथ, होवे भारतमाँ का वन्दन। है नये साल का अभिनन्दन।। नभ से बरसें सुख के बादल, धरती की चूनर धानी हो, गुरुओं का हो सम्मान सदा, जन मानस ज्ञानी-ध्यानी हो, भारत की पावन भूमि से, मिट जाए रुदन और क्रन्दन। है नये साल का अभिनन्दन।। नारी का अटल सुहाग रहे, निश्छल-सच्चा अनुराग रहे, जीवित जंगल और बाग रहें, सुर सज्जित राग-विराग रहें, सच्चे अर्थों में तब ही तो, होगा नूतन का अभिनन्दन। है नये साल का अभिनन्दन।। |
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"नये साल का अभिनन्दन" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
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