Quantcast
Channel: सृजन मंच ऑनलाइन
Viewing all articles
Browse latest Browse all 512

"कदम ही बहक गए"ग़ज़ल-गुरूसहाय भटनागर बदनाम (प्रस्तोता-डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

$
0
0
खाया फरेब-ए-हुस्न तो खाते चले गए
नाकामियों का जश्न मनाते चले गए

हम इतनी पी गए कि कदम ही बहक गए
बहके कदम को यूँ ही सँभाले चले गए

साक़ी तेरी नज़र ने ये क्या कर दिया कि हम
दिल में हसीन ख़्वाब सजाते चले गए

तेरी नवाजि़शों का नशा मय से कम नहीं
रहमत तिरी करम तेरा पाते चले गए

हम आज तक साक़ी के गुनहगार रहे हैं
‘बदनाम’ थे बेख़ुद ये बताते चले गए
(गुरूसहाय भटनागर बदनाम)

Viewing all articles
Browse latest Browse all 512

Latest Images

Trending Articles



Latest Images

<script src="https://jsc.adskeeper.com/r/s/rssing.com.1596347.js" async> </script>