ब्रज बांसुरी"की रचनाएँ .......डा श्याम गुप्त ...
सुमन १..जल .
आवेगी वो सदी जब जल कारन हों युद्ध ,
सदियन पहलें हू भये, जल के कारन युद्ध |
उन्नत मानुस भयो प्रकृति सह भाव बनायौ ,
कुआ बावरी ताल बने जन मन हरसायौ |
निज सुख हित, नास प्रकृति कौ यदि मानुस करतो नहीं ,
जल कारन फिर युद्ध पतन की बात सुनि सकतो कहीं ||
काकी पत्नी कौन है, काके कितेक यार,
कौन करे कब दुश्मनी, कब कर बैठे प्यार |
दुखिया सबते दीन, कबहुँ निरबल अति भारी ,
कबहुँ वही बनि जाय, महा पावरफुल नारी |
सबहिं कौं धूरि चटाय, चाहें माफिया जितनौ बड़ो,
समुझि लेउ बस दूर दरसन सीरियल पल्ले पडौ ||
मेरे नवीनतम प्रकाशित ब्रजभाषा काव्य संग्रह ..."ब्रज बांसुरी"...कीब्रजभाषा में रचनाएँ गीत, ग़ज़ल, पद, दोहे, घनाक्षरी, सवैया, श्याम -सवैया, पंचक सवैया, छप्पय, कुण्डलियाँ, अगीत, नवगीत आदि मेरे ब्लॉग .."हिन्दी हिन्दू हिंदुस्तान " ( http://hindihindoohindustaan.blogspot.com )पर क्रमिक रूप में प्रकाशित की जायंगी ... ....
कृति--- ब्रज बांसुरी (ब्रज भाषा में विभिन्न काव्यविधाओं की रचनाओं का संग्रह )
रचयिता ---डा श्याम गुप्त
--- सुषमा गुप्ता
प्रस्तुत है .....भाव-अरपन तेरह...छपप्य छंद...सुमन १..जल .
आवेगी वो सदी जब जल कारन हों युद्ध ,
सदियन पहलें हू भये, जल के कारन युद्ध |
उन्नत मानुस भयो प्रकृति सह भाव बनायौ ,
कुआ बावरी ताल बने जन मन हरसायौ |
निज सुख हित, नास प्रकृति कौ यदि मानुस करतो नहीं ,
जल कारन फिर युद्ध पतन की बात सुनि सकतो कहीं ||
काकी पत्नी कौन है, काके कितेक यार,
कौन करे कब दुश्मनी, कब कर बैठे प्यार |
दुखिया सबते दीन, कबहुँ निरबल अति भारी ,
कबहुँ वही बनि जाय, महा पावरफुल नारी |
सबहिं कौं धूरि चटाय, चाहें माफिया जितनौ बड़ो,
समुझि लेउ बस दूर दरसन सीरियल पल्ले पडौ ||









