$ 0 0 माता के शुभ चरण छू, छू-मंतर हों कष्ट |वाणी में मिसरी घुले, भाव-कथ्य सुस्पस्ट |भाव कथ्य सुस्पस्ट, अष्ट-गुण अष्ट सिद्धियाँ |पाप-कलुष हों नष्ट, सभी मिट जाय भ्रांतियां |काव्य करे कल्याण, नहीं कविकुल भरमाता |हरदम होंय सहाय, शारदे जय जय माता ||