शहीदों के लिए सिर्फ शम्मा जलाने से क्या होगा
साल में इक बार दिवस मनाने से क्या होगा|
बेहतर है प्रतिदिन चरागे-दिल जलाए जाएँ -
नक़्शे -कदम पे श्याम चल पायं तोअच्छा होगा|
घर हो, बाहर हो जंग हर जगह पे जारी है,
कहीं सांस्कृतिक हमला है कहीं आतंकी तैयारी है|
खुश नशी हैं श्याम ' जो देश की सरहद पे लडे-
अन्दर के दुश्मनों से लड़ें अब हमारी बारी है |
ऐसे भी होते हैं दीवाने हर ज़माने में ,
गीत गाते हैं सचाई के हर ज़माने में |
उनकी फितरत में फरेवो-जफा होती ही नहीं -
जीते हैं नग्मे-वफ़ा , वेवफा ज़माने में |
सो गया थककर के दिन,
रात के आगोश में |
जैसे इक नटखट सा बच्चा-
सोता मां की गोद में |










